
7 मई 2025 को भारत ने एक ऐतिहासिक और सटीक सैन्य अभियान — ऑपरेशन सिंदूर — को अंजाम दिया। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 28 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। इस ऑपरेशन ने न केवल पाकिस्तान और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादी ढांचों को नष्ट किया, बल्कि चीन निर्मित पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली की कमजोरी को भी वैश्विक मंच पर उजागर कर दिया।
ऑपरेशन की शुरुआत: जब आसमान से बरसी आग
भारतीय वायु सेना के राफेल लड़ाकू विमानों ने SCALP क्रूज़ मिसाइलों और AASM हैमर बमों की मदद से पाकिस्तान के अंदर 500 किमी तक घुसकर नौ आतंकवादी ठिकानों को मात्र 23 मिनट में ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई में भारतीय सेना ने इज़राइल के साथ मिलकर विकसित किए गए SkyStriker ड्रोन और Harop लूटरिंग म्यूनिशन का भी इस्तेमाल किया, जिन्होंने पाकिस्तान की चीनी-निर्मित Comprehensive Layered Integrated Air Defence (CLIAD) प्रणाली को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया। इस प्रणाली में चीन के HQ-9BE, FD-2000 और LY-80 (HQ-16) जैसे सिस्टम शामिल थे।
पाकिस्तानी वायु रक्षा का पतन
पाकिस्तान ने वर्षों से चीनी वायु रक्षा प्रणालियों में भारी निवेश किया था, लेकिन यह पूरे ऑपरेशन के दौरान एक भी भारतीय मिसाइल या ड्रोन को रोकने में असफल रहा। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में भारत पर 56 से अधिक ड्रोन और मिसाइलें दागीं, लेकिन भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली ने सभी खतरों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया।
भारत की वायु रक्षा प्रणाली की मास्टरक्लास
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने स्वदेशी और विदेशी तकनीकों के अद्भुत समन्वय का प्रदर्शन किया। DRDO द्वारा विकसित आकाश मिसाइल, QRSAM, VSHORADS, और आकाशतेज कमांड सिस्टम, रूस से प्राप्त S-400 ट्रायंफ सिस्टम के साथ मिलकर एक अभेद्य रक्षा कवच के रूप में सामने आए।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- आकाश और QRSAM ने ड्रोन और सबसोनिक मिसाइलों को रोका।
- VSHORADS ने कम ऊंचाई पर उड़ रहे ‘कामिकाज़े’ ड्रोन को मार गिराया।
- आकाशतेज प्रणाली ने 360 डिग्री निगरानी और वास्तविक समय कमांड प्रदान किया।
- S-400 ने 400 किमी दूर से आने वाली मिसाइलों को ध्वस्त किया।
वैश्विक प्रतिक्रिया और रणनीतिक महत्व
इस ऑपरेशन की विश्वभर में सराहना हुई। अमेरिका, जापान और कई अन्य देशों के रक्षा विशेषज्ञों ने इसे भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक बताया। पाकिस्तान द्वारा किए गए भारतीय विमानों को मार गिराने के दावे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने नकार दिया।
“ब्रांड इंडिया” अब केवल आईटी और अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रहा — यह रक्षा तकनीक में भी एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर रहा है, खासकर एशिया और अफ्रीका में जहाँ अब तक चीन का दबदबा रहा है।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि यह एक रणनीतिक विजय थी। इसने दुनिया को यह दिखा दिया कि भारत न केवल अपने नागरिकों की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि वह अत्याधुनिक सैन्य तकनीक के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन चुका है। इस ऑपरेशन ने चीन के हथियारों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठाए और भारत को एक वैश्विक रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित किया।
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