Unmukt

ऑपरेशन सिन्दूर: भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन और वैश्विक प्रभाव

7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिन्दूर शुरू किया, जो एक त्रि-सेवा सटीक हमला था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-ताइबा (LeT) जैसे समूहों से जुड़े नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया। यह ऑपरेशन रात 1:05 बजे से 1:30 बजे तक चला और इसके बाद 8-9 मई को हुए परिणामों ने भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को प्रदर्शित किया, जो आत्मनिर्भरता की बढ़ती क्षमता का संकेत है। यह लेख स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के उपयोग और भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में स्थिति पर उनके प्रभावों की जांच करता है।

ऑपरेशन सिन्दूर में स्वदेशी प्रणालियों का उपयोग

ऑपरेशन सिन्दूर ने बहावलपुर और मुजफ्फराबाद जैसे स्थानों पर 80-100 आतंकियों को मार गिराया, जिसमें स्वदेशी प्रणालियों का उपयोग कर न्यूनतम संपार्श्विक क्षति सुनिश्चित की गई:

  • स्काईस्ट्राइकर लॉइटरिंग म्यूनिशन्स: बेंगलुरु में अल्फा डिज़ाइन और इज़राइल की एलबिट सिस्टम्स के सहयोग से निर्मित, इन ड्रोनों ने अहमदपुर ईस्ट और मुरिदके में सटीक हमले किए। 100 किमी की रेंज और लाइव वीडियो फीड के साथ, इनने भारत की मानवरहित प्रणालियों की क्षमता दिखाई।
  • डीआरडीओ लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम (एलएमएस): डीआरडीओ के कम लागत वाले स्वार्म ड्रोनों ने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जो सटीक हमलों के लिए किफायती समाधान प्रदान करते हैं, और स्वायत्त हथियार प्रौद्योगिकी में प्रगति को दर्शाते हैं।
  • आईएनएस विक्रांत: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत, जिसने नौसेना-वायुसेना समन्वय का समर्थन किया। मुंबई से 600 नॉटिकल मील की दूरी पर तैनात, इसने संभवतः समुद्री निगरानी प्रदान की।
  • उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (ईडब्ल्यू) सिस्टम: डीआरडीओ के संभवतः संयुक्ता जैसे स्वदेशी ईडब्ल्यू सिस्टम ने दुश्मन संचार और रडार को जाम किया, हमले की गुप्तता सुनिश्चित की।

परिणाम: स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का उपयोग (8-9 मई, 2025)

पाकिस्तान के जवाबी ड्रोन और मिसाइल हमलों ने जम्मू, उधमपुर और राजस्थान में भारतीय ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में स्वदेशी प्रणालियों ने प्रभावी प्रदर्शन किया:

  • एकीकृत काउंटर यूएएस ग्रिड: रडार और ड्रोन-रोधी तकनीकों से युक्त इस स्वदेशी प्रणाली ने 8 मई को जम्मू-कश्मीर में 35 मिनट के ड्रोन हमलों (रात 8:45 से 9:20 बजे) को विफल किया, जिसके मलबे ने इसकी सफलता सिद्ध की।
  • आकाश वायु रक्षा प्रणाली: डीआरडीओ की आकाश प्रणाली, 25-50 किमी की रेंज के साथ, ने सैन्य ठिकानों की रक्षा की, जिसमें हवाई खतरों को 100% रोकने की सफलता मिली।
  • सीड/डेड ऑपरेशन्स: 8 मई को लाहौर में स्वदेशी ईडब्ल्यू सिस्टम ने पाकिस्तान की HQ-9 और HQ-16 रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय कर उनकी कमजोरियों को उजागर किया।
  • बीएसएफ ऑपरेशन्स: 8 मई को सांबा में बीएसएफ ने डीआरडीओ के नेत्र वी ड्रोनों और इंसास राइफलों का उपयोग कर घुसपैठ को रोका।
  • चांदीपुर सुरक्षा समीक्षा: 9 मई को डीआरडीओ ने चांदीपुर, ओडिशा में आकाश और पिनाका जैसी स्वदेशी प्रणालियों की सुरक्षा समीक्षा की।

प्रभावशीलता और वैश्विक प्रभाव

स्वदेशी प्रणालियों ने प्रभावी प्रदर्शन किया, लेकिन राफेल जेट और S-400 जैसे आयातित सिस्टम पर निर्भरता ने आत्मनिर्भरता में कमी को उजागर किया। भारत के रक्षा निर्यात 2023-24 में $2.5 बिलियन तक पहुंचे, जिसमें ब्रह्मोस और पिनाका शामिल हैं, लेकिन यह अमेरिका और चीन से पीछे है। ऑपरेशन सिन्दूर ने भारत को किफायती रक्षा समाधानों के नवप्रवर्तक के रूप में स्थापित किया, जिससे 2025 तक $4.2 बिलियन निर्यात का लक्ष्य संभव प्रतीत होता है। तकनीकी गहराई में सुधार के साथ, भारत वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

Comments

Leave a comment