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मोदी का वैश्विक संदेश: पाकिस्तान की ‘आतंक की यूनिवर्सिटी’ का अर्थ और वैश्विक निहितार्थ

12 मई 2025 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पाकिस्तान के बहावलपुर और मुरीदके में स्थित आतंकी ठिकानों को “वैश्विक आतंकवाद की यूनिवर्सिटी” करार दिया। उन्होंने इन ठिकानों को 9/11 हमले, लंदन ट्यूब बम विस्फोट और भारत में हुए कई आतंकी हमलों से जोड़ा, विशेष रूप से पश्चिमी देशों को यह संदेश देते हुए कि पाकिस्तान की आतंकी बुनियाद पूरी दुनिया के लिए खतरा है। यह बयान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद आया, जिसने 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। इस लेख में हम इस बयान के अर्थ और इसके वैश्विक निहितार्थों का विश्लेषण करेंगे, यह समझते हुए कि यह वैश्विक आतंकवाद विरोधी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को कैसे प्रभावित करता है।

बयान का अर्थ: ‘आतंक की यूनिवर्सिटी’ का तात्पर्य

1.  पाकिस्तान को वैश्विक आतंक का केंद्र बताना:

•  ऐतिहासिक संदर्भ: मोदी ने बहावलपुर और मुरीदके को “आतंक की यूनिवर्सिटी” कहकर इन स्थानों को वैश्विक आतंकवादी गतिविधियों के प्रशिक्षण और नियोजन केंद्र के रूप में चिह्नित किया। ये क्षेत्र लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठनों के गढ़ रहे हैं, जिनके तार 2001 के 9/11 हमलों, 2005 के लंदन ट्यूब बम विस्फोटों और भारत में 2008 के मुंबई हमले जैसे बड़े हमलों से जुड़े हैं। यह बयान इन ठिकानों को केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक खतरे का स्रोत बताता है।

•  पश्चिमी खुफिया जानकारी का उपयोग: मोदी का बयान पश्चिमी खुफिया एजेंसियों, जैसे CIA, की उन रिपोर्टों पर आधारित है, जो लंबे समय से पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को दस्तावेज करती रही हैं। 9/11 हमलों में अल-कायदा के कुछ आतंकियों को पाकिस्तान में प्रशिक्षण मिला था, और लंदन बम विस्फोट करने वालों का LeT के वैचारिक नेटवर्क से संबंध था। यह बयान पश्चिम को उनके ही निष्कर्षों की याद दिलाता है।

2.  आतंक और उसके सरपरस्तों को एकसमान ठहराना:

•  राज्य प्रायोजित आतंकवाद पर हमला: मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब आतंकियों और उनके सरपरस्तों को अलग नहीं मानेगा। यह बयान पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया एजेंसियों पर सीधा निशाना है, जिन पर LeT और JeM जैसे समूहों को समर्थन देने का आरोप है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए आतंकियों को विदाई देने के लिए पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों का उमड़ना इस राज्य प्रायोजित आतंकवाद का सबूत है।

•  नैतिक और रणनीतिक अपील: “आतंक की यूनिवर्सिटी” का रूपक मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में आतंकवाद को प्रस्तुत करता है, जो वैश्विक समुदाय से एकजुटता की मांग करता है। यह भारत को एक नैतिक और रणनीतिक नेता के रूप में स्थापित करता है, जो आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने को तैयार है।

3.  परमाणु ब्लैकमेल का खंडन:

•  पाकिस्तान की रणनीति पर प्रहार: पाकिस्तान ने लंबे समय से अपने परमाणु शस्त्रागार (लगभग 170 वॉरहेड्स) का उपयोग आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को रोकने के लिए किया है। मोदी का बयान, जिसमें उन्होंने “परमाणु ब्लैकमेल” को खारिज किया, यह संदेश देता है कि भारत ऐसी धमकियों से डरेगा नहीं। ऑपरेशन सिंदूर, जो परमाणु जोखिम के बावजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले कर सफल रहा, इस दृढ़ता का प्रमाण है।

•  वैश्विक संदेश: यह बयान उन देशों को चेतावनी देता है जो परमाणु शक्ति का दुरुपयोग आतंकवाद को ढाल देने के लिए करते हैं, और साथ ही पश्चिम से मांग करता है कि वे ऐसी रणनीतियों को बर्दाश्त न करें।

वैश्विक निहितार्थ: विश्व के लिए इसका क्या अर्थ है

मोदी का बयान और ऑपरेशन सिंदूर वैश्विक आतंकवाद विरोधी नीतियों, कूटनीति और सामरिक गठबंधनों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इसके प्रमुख निहितार्थ निम्नलिखित हैं:

1.  पश्चिमी जवाबदेही और नीतिगत बदलाव:

•  साझा खतरे की याद: 9/11 और लंदन बम विस्फोटों का उल्लेख पश्चिमी देशों को उनके अपने अनुभवों से जोड़ता है, उन्हें पाकिस्तान के आतंकी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर करता है। अमेरिका और ब्रिटेन, जो आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध का नेतृत्व करने का दावा करते हैं, अब अपनी नीतियों को भारत की जीरो टॉलरेंस नीति के साथ संरेखित करने के दबाव में हैं।

•  दोहरे मापदंडों का अंत: पश्चिम ने भू-राजनीतिक हितों (जैसे अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका या चीन के खिलाफ संतुलन) के कारण पाकिस्तान को रियायतें दी हैं। उदाहरण के लिए, 2001 से अमेरिका ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सैन्य सहायता दी, जबकि LeT और JeM जैसे समूह वहां सक्रिय रहे। मोदी का बयान इन दोहरे मापदंडों को चुनौती देता है, और X पर चर्चा इसे “कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक” करार देती है।

•  प्रतिबंधों की मांग: बयान अप्रत्यक्ष रूप से पश्चिम से मांग करता है कि वे पाकिस्तान पर सख्त प्रतिबंध लगाएं या इसे आतंकी राज्य घोषित करें, जैसा कि राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सुझाया था। यह 2019 में JeM प्रमुख मसूद अजहर को UNSC द्वारा आतंकी घोषित करने जैसी कार्रवाइयों को और बढ़ाने का आह्वान है।

2.  वैश्विक आतंकवाद विरोधी नेतृत्व में भारत की भूमिका:

•  निर्णायक कार्रवाई का प्रदर्शन: ऑपरेशन सिंदूर, जो स्वदेशी ड्रोन्स और मिसाइलों पर आधारित था, ने भारत की सैन्य और तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने रखा। जहां अमेरिका और ब्रिटेन ने तनाव कम करने की अपील की, वहीं भारत ने आतंकी ठिकानों को नष्ट कर अपनी दृढ़ता दिखाई। रूस, इजरायल और फ्रांस जैसे देशों के नेताओं की प्रशंसा ने भारत की स्थिति को मजबूत किया।

•  नया सामान्य (न्यू नॉर्मल): मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ “नया सामान्य” स्थापित किया, जिसमें आतंकी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देना, परमाणु ब्लैकमेल को खारिज करना, और आतंकियों व उनके सरपरस्तों को एकसमान ठहराना शामिल है। यह नीति पश्चिमी देशों को प्रेरित कर सकती है कि वे भी आतंकवाद के खिलाफ अधिक आक्रामक रुख अपनाएं।

•  आत्मनिर्भरता का संदेश: ऑपरेशन में स्वदेशी हथियारों की सफलता ने भारत की आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित किया, जो अन्य देशों को अपनी रक्षा क्षमताओं को विकसित करने की प्रेरणा दे सकता है। यह वैश्विक हथियार बाजार, खासकर पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं, पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक कदम है।

3.  पाकिस्तान पर बढ़ता दबाव:

•  आतंकी ढांचे का खात्मा: मोदी ने चेतावनी दी कि आतंकवाद को बढ़ावा देना पाकिस्तान को नष्ट कर देगा। भारत की कूटनीतिक कार्रवाइयां, जैसे सिंधु जल संधि को निलंबित करना और पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित करना, वैश्विक समुदाय से मांग करती हैं कि वे पाकिस्तान को आतंकी समर्थन बंद करने के लिए मजबूर करें।

•  परमाणु रणनीति पर प्रभाव: भारत की कार्रवाइयों ने दिखाया कि परमाणु धमकियां आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को नहीं रोक सकतीं। यह अन्य परमाणु-सशस्त्र देशों के लिए एक मिसाल कायम करता है, और पश्चिम को चेतावनी देता है कि परमाणु जोखिम के डर से आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

•  अलगाव का खतरा: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की असफल जवाबी कार्रवाइयों और 10 मई को तनाव कम करने की गुहार ने इसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया। मोदी का बयान इस अलगाव को और गहरा करता है, जिससे पश्चिमी देशों के लिए पाकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

4.  भू-राजनीतिक पुनर्संतुलन:

•  पश्चिम के साथ संबंध: बयान अमेरिका और यूरोपीय देशों को भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है, खासकर तब जब भारत ने आतंकवाद विरोधी लड़ाई में नेतृत्व दिखाया है। डोनाल्ड ट्रम्प और इमैनुएल मैक्रों जैसे नेताओं के समर्थन ने इसकी शुरुआत को दर्शाया।

•  रूस और इजरायल के साथ गठजोड़: रूस और इजरायल का मजबूत समर्थन भारत को एक बहुध्रुवीय विश्व में मजबूत स्थिति देता है, जो पश्चिमी हिचकिचाहट के खिलाफ एक संतुलन बनाता है।

•  दक्षिण एशिया में तनाव: बयान और ऑपरेशन दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ा सकते हैं, जिसके लिए पश्चिमी देशों को सावधानीपूर्वक कूटनीति अपनानी होगी ताकि गलत अनुमान से बचा जा सके।

संभावित चुनौतियां और आलोचनात्मक दृष्टिकोण

हालांकि मोदी का बयान कूटनीतिक रूप से शक्तिशाली है, इसके प्रभाव की सफलता पश्चिमी नीतियों पर निर्भर है। पाकिस्तान के साथ उनके भू-राजनीतिक हित, जैसे चीन के खिलाफ संतुलन, कार्रवाई में बाधा बन सकते हैं। बयान क्षेत्रीय गतिशीलता को सरल बना सकता है, जिससे पाकिस्तान में सुधारवादी तत्वों का अलगाव हो सकता है। इसके अलावा, आतंकवाद को पूरी तरह पाकिस्तान से जोड़ना वैश्विक आतंकवाद की जटिलता को कम आंक सकता है, जिसमें अन्य क्षेत्रों और गैर-राज्य अभिकर्ताओं की भी भूमिका है।

निष्कर्ष

मोदी का “वैश्विक आतंकवाद की यूनिवर्सिटी” वाला बयान पश्चिमी देशों के लिए एक जागृति कॉल है, जो उन्हें पाकिस्तान के आतंकी ढांचे के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने और भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का समर्थन करने को कहता है। यह ऑपरेशन सिंदूर की स्वदेशी सफलता के साथ मिलकर भारत को आतंकवाद विरोधी लड़ाई में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है। बयान पश्चिमी जवाबदेही, परमाणु रणनीतियों में बदलाव, और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने की मांग करता है, साथ ही आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। हालांकि, इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिए निरंतर कूटनीतिक दबाव और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है। अधिक जानकारी के लिए, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (www.pib.gov.in) जैसे आधिकारिक स्रोत उपयोगी हो सकते हैं।

भारत माता की जय

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